Skip to main content

Featured Post

Hindi Poem || Love Proposal || स्वीकार यदि लेती मुझे || KaviKumar Sumit || Poem In Hindi

ग़ज़ल : माज़रे बेतुकी By कविकुमार सुमित

 ग़ज़ल : माज़रे बेतुकी







माज़रे बेतुकी की यहाँ प्यास है,
जो छुएँ न कभी हम वही रास है |

जो छुएँ न कभी हम वही रास है...

नाम की है अदालत खड़ी देश में,
सिक रही रोटियों पर टिकी आस है |

माज़रे बेतुकी की यहाँ प्यास है,
जो छुएँ न कभी हम वही रास है...

पूँछ आए उसे भी फटाफट उसे,
भागता है हमेशा यहाँ ख़ास है |

माज़रे बेतुकी की यहाँ प्यास है,
जो छुएँ न कभी हम वही रास है...

बाज़रा पेट नापे चना खेत को,
बेचकर जो बची है वही घास है |

माज़रे बेतुकी की यहाँ प्यास है,
जो छुएँ न कभी हम वही रास है...

जो छुएँ न कभी हम वही रास है...
 all rights reserved