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Hindi Poem || Love Proposal || स्वीकार यदि लेती मुझे || KaviKumar Sumit || Poem In Hindi


स्वीकार यदि लेती मुझे



वे सुनहरे पल सजाकर,
हर सपन साकार करता,
व्यर्थ कि शर्तें गिनाकर,
कभी न अधिकार करता


बिना प्रेमी चयन के,
दिवस कुछ देती मुझे,
आत्म संयम नहीं खोता,
स्वीकार यदि लेती मुझे


शब्द कुछ हैं याद मुझको,
अर्थ भी कम जानता हूँ,
भय से कर पाता हूँ बातें,
जब समन्दर छानता हूँ


अभी न तो कभी होती,
हाँ-नहीं कुछ बात होती,
कम से कम शुरुआत होती,
स्वीकार यदि लेती मुझे


ह्रदय होता धन्य अपना,
 प्रीति धारा फूट पड़ती,
नेत्र हर्षित हो चमकते,
अश्रु धारा टूट पड़ती


उठा हल्का दर्द कहता,
तुम्हीं हो मेरे तलों में,
स्वतः हो जाता निवारण,
स्वीकार यदि लेती मुझे


यह समझना है कठिन,
पढूँ कैसे भावना को?
तुमने अब तक नहीं बोला,
छोड़ दूँ क्यों साधना को?


कई जीते ह्रदय मैंने,
कई तोड़े नियम बन्धन,
सभी लगते सत्य मुझको,
स्वीकार यदि लेती मुझे